पटना। टीएमसी से निष्कासित मुर्शिदाबाद विधायक हुमायूं कबीर द्वारा तथाकथित बाबरी मस्जिद शिलान्यास का आयोजन न केवल कानून का खुला उल्लंघन है, बल्कि यह भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक सौहार्द और न्यायपालिका के सम्मान पर सीधा प्रहार है। यह कृत्य देश की शांति को भंग करने और समाज को विभाजित करने की गंभीर साजिश को दर्शाता है। यह बातें प्रदेश प्रवक्ता भाजपा प्रेम रंजन पटेल ने कही।
पटेल ने कहा कि भारत एक संविधान-प्रधान राष्ट्र है, जहाँ न्यायालय के निर्णय सर्वमान्य और बाध्यकारी होते हैं। अयोध्या प्रकरण पर सर्वोच्च न्यायालय का स्पष्ट और अंतिम निर्णय आ चुका है, जिसे पूरे देश ने लोकतांत्रिक मर्यादा के तहत स्वीकार किया। ऐसे में किसी भी प्रकार का उकसाऊ और भड़काऊ आयोजन न केवल न्यायपालिका की अवमानना है, बल्कि यह धार्मिक उन्माद फैलाने का घिनौना प्रयास भी है।
हुमायूं कबीर का यह कृत्य यह साबित करता है कि कुछ लोग राजनीतिक हाशिये पर जाने के बाद भी सस्ती लोकप्रियता के लिए देश की एकता और अखंडता से खिलवाड़ करने से बाज नहीं आते। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि तुष्टीकरण और कट्टरता की राजनीति ने कुछ नेताओं को इतना अंधा कर दिया है कि उन्हें राष्ट्रहित, सामाजिक शांति और सांस्कृतिक सम्मान का कोई आग्रह नहीं रह गया है।
भारत की संस्कृति “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना पर आधारित है, जहाँ विविधता में एकता हमारी पहचान है। इस प्रकार के उकसाऊ कृत्य उस मूल भावना पर हमला हैं, जिसने सदियों से भारत को मजबूत और अखंड बनाए रखा है। देश की जनता अब ऐसे लोगों की मंशा को भली-भांति समझ चुकी है और समय आने पर लोकतांत्रिक तरीके से करारा जवाब देगी।
पश्चिम बंगाल प्रशासन तथा कानून प्रवर्तन एजेंसी द्वारा हुमायूं कबीर द्वारा किए गए इस गंभीर और भड़काऊ कृत्य पर तत्काल संज्ञान लिया जाये तथा संविधान और कानून के तहत सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति देश की सांस्कृतिक एकता और सामाजिक सौहार्द के साथ खेलने का दुस्साहस न कर सके।
भारत शांति, न्याय और सांस्कृतिक सम्मान का देश है—इसे चुनौती देने वालों को न तो स्वीकार किया जाएगा और न ही बख्शा जाएगा।






