तेजस्वी का सदन से गायब होना गैर जिम्मेदराना हरकत: भाजपा

पटना। नवगठित विधानसभा के प्रथम सत्र से ही नेता प्रतिपक्ष का बिना किसी सूचना के गायब हो जाना यह स्पष्ट संकेत देता है कि विपक्ष न तो सदन की गरिमा के प्रति प्रतिबद्ध है और न ही बिहार की वास्तविक समस्याओं को समाधान करने की गंभीर इच्छा रखता है। जिस समय बिहार के विकास, रोजगार, कृषि, कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दों पर ठोस बहस और रचनात्मक सुझावों की आवश्यकता थी, विपक्ष का इस तरह सदन से पलायन करना उनकी जिम्मेदारी से भागने का प्रमाण है।

विपक्ष की यह गैर-जिम्मेदाराना हरकत उन करोड़ों बिहारवासियों का अपमान है जिन्होंने लोकतंत्र को मजबूती देने के लिए अपने मताधिकार का प्रयोग किया। सदन से अनुपस्थित रहकर वे यह दिखा रहे हैं कि उन्हें जनता की तकलीफ़ों से कोई सरोकार नहीं, उनका लक्ष्य केवल राजनीतिक नाटक करना और सुर्खियाँ बटोरना है।

जबकि एनडीए सरकार विकास की गति तेज करने, सुशासन को मजबूत बनाने और जनता के हित में ठोस निर्णय लेने के लिए सतत प्रयासरत है, वहीं विपक्ष अपनी भूमिका निभाने में पूरी तरह विफल हो चुका है। लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष का होना आवश्यक है, परंतु ऐसा विपक्ष जो सदन से ही गायब हो जाए, जनता की आवाज़ कैसे बनेगा?

जनता यह सब देख रही है और आने वाले समय में ऐसी नकारात्मक राजनीति एवं कर्तव्यहीन विपक्ष को मुंहतोड़ जवाब भी देगी। बिहार विकास चाहता है—गायब रहने वाली राजनीति नहीं।