पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार (Bihar Chief Minister Nitish Kumar) की पार्टी जद (यू0) (jdu) के विधान पार्षद सह मुख्य प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार (Neeraj Kumar) ने रात के अंधेरे में लालू-राबड़ी (Lalu Prasad Yadav RabriDevi) आवास खाली करने को लेकर तंज कसते हुए कहा कि आखिर यह कार्रवाई किसकी अनुमति से की गई? राबड़ी परिवार इस समय आवास पर मौजूद नहीं है, तो फिर किसके आदेश पर सरकारी संपत्ति समझे जाने वाले गमलों को रात के अँधेरे में ट्रक पर लादकर भेज दिया गया?
अगर राबड़ी परिवार की अनुमति से यह किया गया है तो यह स्पष्ट रूप से अनुचित है, क्योंकि सरकारी बंगले में रखी वस्तुओं को निजी संपत्ति की तरह ले जाना किसी भी स्थिति में तर्कसंगत नहीं हो सकता। और अगर अनुमति नहीं दी गई, तो और गंभीर सवाल खड़ा होता है कि आखिर किसके निर्देश पर ऐसा किया गया?
उन्होंने कुछ अहम सवाल पूछे:
1 क्या बंगला खाली करने के दौरान गमलों को ले जाने को लेकर उद्यान विभाग ने अनुमति दी थी? क्या कोई अधिकारिक पत्र है?
2 अगर राबड़ी-लालू परिवार की अनुमति से गमले ले जाए गए तो क्या यह सरकारी बंगले को निजी संपत्ति समझने का खुला प्रमाण नहीं है?
3 जब परिवार खुद बंगले में मौजूद नहीं है, तो आदेश किसने दिया? और अगर आदेश दिया गया है, तो उसका लिखित प्रमाण दिखाएं?
4 क्या ये सही नहीं कि बंगले में कुछ ऐसा मौजूद हो जिसकी जानकारी आम नहीं है-चाहे तहखाने में रखे जमीन से जुड़े दस्तावेज, सोना, चांदी एवं अवैध तरीके से अर्जित संपत्ति? जिसे लेकर बाद में राजनीतिक शोर मचाया जाए?
लालू-राबड़ी परिवार को बिहार की जनता को ये बताना चाहिए कि गमला-प्रकरण आखिर है क्या? गमलों को ले जाने का आदेश किसका है? और क्या सरकारी सम्पत्ति पर उनका निजी अधिकार है?






