अभियान: आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के ‘केयरिंग हैंड्स’ कार्यक्रम के 14 साल पूरे, 5.5 लाख से अधिक बच्चों के आंखों की हुई जांच

मुंबई। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड, जो भारत की प्रमुख निजी जनरल इंश्योरेंस कंपनियों में से एक है, ने अपने प्रमुख सीएसआर कार्यक्रम ‘केयरिंग हैंड्स’ के 14 साल पूरे होने की घोषणा की। इस पहल का उद्देश्य कमजोर तबके के बच्चों की आंखों की सेहत सुधारना है।

2011 में शुरू हुई यह पहल आज देश की सबसे प्रभावशाली कर्मचारी-नेतृत्व वाली हेल्थ पहल में से एक बन चुकी है। इसमें स्कूलों में बच्चों की फ्री आंखों की जांच की जाती है और जरूरत पड़ने पर उन्हें मुफ्त चश्मे भी दिए जाते हैं। पिछले 14 साल में केयरिंग हैंड्स कार्यक्रम के तहत 5.5 लाख से ज्यादा बच्चों की आंखों की जांच हो चुकी है और 50,000 से अधिक चश्मे बांटे जा चुके हैं। इससे हजारों बच्चों में कमजोर नजर की समय पर पहचान हुई और कई बच्चों को आगे होने वाली आंखों की समस्याओं से बचाया जा सका।

भारत में करीब 34 लाख स्कूल के बच्चे हर दिन कमजोर नजर या बिना सुधारे हुए विजन की समस्या के साथ क्लास में पहुंचते हैं। इसका सीधे उनकी पढ़ाई पर असर पड़ता है। रिसर्च बताती है कि ऐसे बच्चे, सही या साफ नजर वाले बच्चों की तुलना में लगभग आधा ही सीख पाते हैं। इनमें से कई बच्चों के लिए, एक साधारण-सा चश्मा पीछे रह जाने और पहली बार ब्लैक बोर्ड को साफ-साफ देख पाने के बीच का फर्क पैदा कर सकता है।

इस साल के केयरिंग हैंड्स कार्यक्रम ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। देशभर के कर्मचारियों ने मिलकर 275 से ज्यादा कैंप में 50,000 से अधिक बच्चों की आंखों की जांच की। केयरिंग हैंड्स की बदौलत कई छोटे बच्चे, जो पहले पढ़ने, लिखने या दूर से चेहरों को पहचानने में संघर्ष करते थे, अब स्पष्ट नजर के साथ अपनी जिंदगी में बड़ा बदलाव महसूस कर रहे हैं।

आईसीआईसीआई लोम्बार्ड की हेड – मार्केटिंग, कॉर्पोरेट कम्युनिकेशंस एंड सीएसआर, शीना कपूर ने कहा कि, “केयरिंग हैंड्स के 14 साल पूरे करते हुए हमें यह अहसास होता है कि यह सिर्फ एक सीएसआर प्रोग्राम नहीं है, बल्कि यह हमारे कर्मचारियों की संवेदनशीलता और समर्पण से चलने वाला एक सामूहिक मिशन है। हर कैंप हमें ऐसी कहानियां देता है, जो बताती हैं कि यह काम क्यों जरूरी है: जैसे कोई बच्चा जो पहली बार ब्लैकबोर्ड साफ देख पाता है, कोई टीचर जो उसके आत्मविश्वास में बदलाव देखता है, या कोई परिवार जिसे सिर्फ एक चश्मे से नई उम्मीद मिलती है।”

उन्होंने आगे कहा कि, “इस साल, जब आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के 25 साल पूरे हो रहे हैं, हमने केयरिंग हैंड्स का दायरा बढ़ाते हुए इसे अपने कुछ प्रमुख पार्टनर्स तक भी पहुंचाया, ताकि मदद का यह सर्कल और बड़ा हो सके। भारत में अभी भी लाखों बच्चे बिना सुधारी गई नजर के साथ स्कूल जा रहे हैं, इसलिए यह काम और भी जरूरी हो जाता है। केयरिंग हैंड्स हमें इन बच्चों की छिपी हुई मुश्किलों को सामने लाने और हमारे कर्मचारियों को समाधान का हिस्सा बनने का मौका देता है। हम मिलकर सिर्फ नजर ही नहीं सुधार रहे, हम सीखने, अवसर और एक बेहतर भविष्य के लिए रास्ते खोल रहे हैं।”

केयरिंग हैंड्स अब आईसीआईसीआई लोम्बार्ड की काम करने की संस्कृति का एक अहम हिस्सा बन चुका है, और इसकी खासियत है कि यह पूरी तरह कर्मचारियों द्वारा चलाया जाने वाला कार्यक्रम है। इस पहल को शुरू से अंत तक कर्मचारी स्वयंसेवकों की टीम संभालती है, स्कूलों और डॉक्टरों से समन्वय करने से लेकर कैंप की तैयारी, व्यवस्था और बाद की फॉलो-अप तक हर जिम्मेदारी वही निभाते हैं।

यह कार्यक्रम न सिर्फ टीमवर्क को मजबूत करता है, बल्कि कर्मचारियों को लीडरशिप और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट जैसी स्किल्स सीखने का भी मौका देता है, क्योंकि उन्हें असली जमीनी जिम्मेदारियां निभानी होती हैं। हालांकि केयरिंग हैंड्स की तैयारी दो महीने पहले शुरू होती है, लेकिन आंखों की जांच के लिए कैंप पूरे देश में एक ही दिन आयोजित किए जाते हैं, जो संगठन की एकजुट सोच और शानदार संचालन क्षमता को दिखाता है।