भारत में गहरा हो रहा है डायबिटीज का संकट, दुनिया के दूसरे सबसे बड़े डायबिटिक देश में शामिल हुए हम

नई दिल्ली, 12 नवंबर, 2025: ‘डायबिटीज भारत के लिए सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में सामने आ रहा है और इससे बचाव के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। आज की तारीख में भारत मेटाबोलिक हेल्थ क्राइसिस के मुहाने पर खड़ा है। हाई ब्लड प्रेशर, पेट पर ज्यादा चर्बी और आलस्य भरी आदतों के रूप में कई ऐसे रिस्क फैक्टर हैं, जो पूरे देश में बढ़ रहे हैं। भारत में करीब 9 करोड़ वयस्क डायबिटिक हैं और हम दुनिया के दूसरे सबसे बड़े डायबिटिक देश हैं। जल्दी पता लगने, स्क्रीनिंग और इलाज के प्रोटोकॉल का पालन जरूरी है। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के पूर्व सचिव और इलनेस टु वेलनसे फाउंडेशन की गवर्निंग काउंसिल के चेयरपर्सन श्री राजेश भूषण ने यह बात कही।

वह विश्व मधुमेह दिवस (वर्ल्ड डायबिटीज डे) के पूर्व नई दिल्ली में ‘प्रिवेंशन एंड मैनेजमेंट ऑफ डायबिटीज’ विषय पर आयोजित इलनेस टु वेलनेस अवेयरनेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इसे लेकर प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य एवं केंद्र सरकार, दोनों की है। हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था में डायबिटीज जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों के लिए सिस्टमैटिक स्क्रीनिंग एवं प्रिवेंटिव केयर पर फोकस की जरूरत है।’

इलनेस टु वेलनेस फाउंडेशन ने डायबिटीज से बचाव, जल्दी जांच और उम्र एवं लैंगिक आधार पर प्रभावी प्रबंधन के लिए रणनीति बनाने के उद्देश्य से कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। इसमें जीवन के अलग-अलग चरणों में डायबिटीज की स्थिति पर विशेष फोकस किया गया। इस कार्यक्रम में अग्रणी मेडिकल प्रोफेशनल्स, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ और नीति निर्माता एक मंच पर आए और प्रिवेंटिव हेल्थकेयर एवं लाइफस्टाइल आधारित कदमों को लेकर एक राष्ट्रीय विमर्श को गति दी।

डायबिटीज को टाला जा सकता है

उपस्थित लोगों का धन्यवाद करते हुए इलनेस टु वेलनेस की एडवाइजरी काउंसिल के चेयरपर्सन श्री अनिल राजपूत ने कहा, ‘डायबिटीज को टाला जा सकता है, नियंत्रित किया जा सकता है और यहां तक कि कुछ छोटे, लगातार एवं सतर्क कदमों की मदद से इससे बचा भी जा सकता है। संपूर्ण कल्याण को लेकर हमारी प्राचीन परंपराएं हमें याद दिलाती हैं कि अच्छी सेहत की नींव बीमारियों से बचाव में है। योग, सूर्य नमस्कार और प्राणायम जैसी गतिविधियों से इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधारने, मेटाबॉलिज्म को ताकत देने, तनाव कम करने और मानसिक शांति में मदद मिलती है। इलनेस टु वेलनेस फाउंडेशन में हमारा मिशन जागरूकता लाना और लोगों को व्यापक एवं बचाव के कदमों के जरिये अपने स्वास्थ्य को संभालने के लिए प्रेरित करना है।’

डायबिटीज मैनेजमेंट को लेकर बदलती समझ के बारे में फोर्टिस-सी-डॉक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर डायबिटीज, मेटाबोलिक डिसीजेज एंड एंडोक्रायनोलॉजी, फोर्टिस के चेयरमैन (पद्मश्री) डॉ. अनूप मिश्रा ने कहा, ‘लंबे समय तक हमारी एप्रोच के केंद्र में शुगर लेवल रहा है। डायबिटीज मैनेजमेंट में इससे आगे सोचने की जरूरत है, जिसमें फैट कंट्रोल, कोलेस्ट्रॉल मैनेजमेंट और शारीरिक क्षमता जैसे विषय शामिल हैं। विशेषरूप से महिलाओं के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग बहुत जरूरी है। सिर्फ चलना पर्याप्त नहीं है, हमें कार्डियोरेस्पिरेटरी, रेजिस्टेंस और मसल स्ट्रेंथ की एक्सरसाइज की भी जरूरत है, जिससे संतुलन बन सके और लंबी अवधि में परेशानियों से बचाव हो। जितनी ज्यादा स्ट्रेंथ होती है, मेटाबोलिक हेल्थ उतनी ही अच्छी होती है।’

प्रिवेंटिव हेल्थकेयर को मजबूत करने, बेहतर लाइफस्टाइल अपनाने और स्वस्थ एवं डायबिटीज-मुक्त भविष्य के निर्माण की दिशा में मिलकर काम करने के लिए नीति निर्माताओं, हेल्थ प्रोफेशनल्स और आम जन द्वारा साझा प्रयासों की अपील के साथ कॉन्फ्रेंस का समापन हुआ।