नई दिल्ली । दिल्ली के चांदनी चौक से सांसद श्री प्रवीन खंडेलवाल ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से राष्ट्रीय जनसंख्या प्रबंधन नीति लागू करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि भारत आज एक महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय मोड़ पर खड़ा है, जहां इसकी विशाल जनसंख्या एक ओर ताकत है, तो दूसरी ओर बढ़ती हुई चुनौती भी है।
प्रधानमंत्री को भेजे गए अपने पत्र में श्री खंडेलवाल ने कहा कि देश की 1.4 अरब से अधिक जनसंख्या, यदि सही ढंग से प्रबंधित की जाए, तो आर्थिक विकास की मजबूत आधारशिला बन सकती है, लेकिन यदि इसे नजरअंदाज किया गया, तो यह संसाधनों, बुनियादी ढांचे, रोजगार, स्वास्थ्य, आवास और शिक्षा प्रणालियों पर गंभीर दबाव डाल सकती है। उन्होंने कहा कि तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या के कारण शहरी भीड़भाड़, बेरोजगारी, पर्यावरणीय क्षरण तथा जल और भूमि जैसे प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि एक सुव्यवस्थित जनसंख्या प्रबंधन नीति से जनसंख्या वृद्धि को देश की आर्थिक क्षमता और विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप लाया जा सकेगा, जिससे बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर योजना, सार्वजनिक सेवाओं की प्रभावी आपूर्ति और नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार सुनिश्चित होगा।
श्री खंडेलवाल ने बताया कि भारत वर्तमान में जनसांख्यिकीय परिवर्तन के एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है, जहां बड़ी संख्या में युवा कार्यबल में प्रवेश कर रहे हैं। यह जनसांख्यिकीय लाभांश प्राप्त करने का एक ऐतिहासिक अवसर है, लेकिन उचित योजना और जनसंख्या स्थिरीकरण के अभाव में यह एक बोझ में भी बदल सकता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि प्रस्तावित नीति में जागरूकता, शिक्षा और छोटे परिवार के स्वैच्छिक अपनाने पर विशेष जोर होना चाहिए। इसके साथ ही सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, महिला सशक्तिकरण और जिम्मेदार पारिवारिक नियोजन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। साथ ही, विभिन्न राज्यों में जनसंख्या वृद्धि के अलग-अलग पैटर्न को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र-विशेष रणनीतियां अपनाई जानी चाहिए।
श्री खंडेलवाल ने कहा कि ऐसी नीति पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने, शहरी ढांचे पर दबाव कम करने और वैश्विक प्रतिबद्धताओं के अनुरूप सतत विकास सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जनसंख्या प्रबंधन का अर्थ किसी प्रकार का दबाव या बाध्यता नहीं है, बल्कि जागरूकता बढ़ाने, सूचित निर्णय लेने में मदद करने और समावेशी विकास सुनिश्चित करने से है।
श्री खंडेलवाल ने कहा, “भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में यह आवश्यक है कि जनसंख्या वृद्धि, संसाधनों, अवसरों और आकांक्षाओं के साथ संतुलन में हो।”






