पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार सरकार ने जल संरक्षण के क्षेत्र में ऐतिहासिक और दूरदर्शी कार्य किए हैं, जो आज राज्य की आने वाली पीढ़ियों के लिए संजीवनी साबित हो रहे हैं। जद (यू) प्रदेश प्रवक्ता हिमराज राम, प्रदेश प्रवक्ता परिमल कुमार एवं मीडिया पैनलिस्ट मधुरेंदु पांडेय ने मीडिया में जारी बयान में कहा कि ‘‘संरक्षण भी, समाधान भी’’ की सोच के साथ सरकार ने न केवल परंपरागत जलस्रोतों को पुनर्जीवित किया है, बल्कि नए जलस्रोतों के निर्माण के माध्यम से जल संकट की चुनौती का स्थायी समाधान भी प्रस्तुत किया है।
राज्य भर में 1.40 लाख से अधिक पुराने जलस्रोतों का जीर्णोद्धार कर उन्हें फिर से उपयोगी बनाया गया है, जिससे भू-जल स्तर में सुधार हुआ है और किसानों, ग्रामीणों तथा शहरी आबादी को जल उपलब्धता सुनिश्चित हुई है। इसके साथ ही 73 हजार से अधिक नए जलस्रोतों का निर्माण कर सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल वर्तमान की नहीं, बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर नीतियाँ बना रही है। मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार सरकार का मानना है कि प्राकृतिक जल संसाधन केवल विकास का साधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार हैं। इसी सोच के तहत तालाबों, आहर-पइन, चेकडैम और अन्य पारंपरिक जल संरचनाओं के संरक्षण और संवर्धन को प्राथमिकता दी गई है। इन प्रयासों का सकारात्मक असर न केवल कृषि और पेयजल व्यवस्था पर पड़ा है, बल्कि पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने में भी मदद मिली है।
बिहार में जल संरक्षण कोई नारा नहीं, बल्कि एक सतत अभियान है। मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार की सरकार ने नीति, नीयत और निरंतरता के साथ यह सिद्ध किया है कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो तो प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करते हुए विकास के नए आयाम स्थापित किए जा सकते हैं। बिहार आज जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के लिए एक प्रेरक माॅडल बनकर उभर रहा है।






