नई दिल्ली। बिहार (Bihar) की धरती ने हमेशा देश को प्रतिभाशाली रत्न दिए हैं और अब इस सूची में समस्तीपुर (samastipur) के 14 वर्षीय क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) का नाम स्वर्ण अक्षरों में जुड़ गया है। बिहार के होनहार क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति भवन (Rashtrapati Bhavan.) में आयोजित औपचारिक समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu ) ने वैभव सूर्यवंशी को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया।
एक साधारण परिवार से निकलकर वैभव ने अपनी मेहनत, अनुशासन और प्रतिभा के दम पर वह मुकाम हासिल किया है, जिसे देखकर आज पूरा देश गर्व महसूस कर रहा है। क्रिकेट के मैदान पर लगातार रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन करने वाले वैभव अब बिहार के साथ ही देशभर में युवाओं के बीच अपनी पहचाने बना चुके हैं।
कम उम्र में असाधारण प्रतिभा, अनुशासन और कड़ी मेहनत के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना हर युवा के लिए प्रेरणास्रोत है। यह सम्मान न केवल वैभव की उपलब्धि है, बल्कि बिहार की खेल प्रतिभा और उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक भी है।
बिहार के होनहार क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (Prime Minister’s National Children’s Award) से सम्मानित किए जाने पर समाज और राजनीति के हर क्षेत्र से लोगों ने हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। भारतीय जनता पार्टी (bjp) ने सोशल मीडिया पोस्ट में वैभव को बधाई दी है। वहीं बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार की अगुवाई वाली जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा (Sanjay Jha, national executive president of JDU led by Bihar Chief Minister Nitish Kumar) ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिये बधाई दी है।
कौन हैं वैभव

क्रिकेट में वैभव का सफर बेहद कम उम्र में शुरू हुआ। महज 12 वर्ष की उम्र में बिहार के लिए रणजी ट्राफी में पदार्पण कर वे आधुनिक क्रिकेट के सबसे कम उम्र के प्रथम श्रेणी खिलाड़ी बने। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 टीम के खिलाफ सिर्फ 58 गेंदों में शतक जड़कर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। यह सम्मान केवल एक खिलाड़ी के साथ ही समस्तीपुर की उस मिट्टी के लिए भी है, जिसने सीमित संसाधनों के बावजूद एक असाधारण प्रतिभा को गढ़ा। राष्ट्रपति की ओर से सम्मानित किए जाने के क्षण को समस्तीपुर के लोगों ने अपने सपनों की जीत के रूप में देखा।






