फिक्की कास्केड के सेमिनार में बोले केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी, उपभोक्ताओं के भरोसे को कमजोर करता है अवैध व्यापार

नई दिल्ली, 08 अप्रैल 2026: भारत का तेज आर्थिक विकास उपभोग के तरीकों और मार्केट डायनामिक्स को नया रूप दे रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए भारत सरकार के माननीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी ने वर्चुअल माध्यम से सेमिनार को संबोधित करते हुए अवैध व्यापार को एक “छाया अर्थव्यवस्था” (शेडो इकोनॉमी) की संज्ञा दी।

फिक्की कास्केड द्वारा “उपभोक्ताओं की सुरक्षा: तस्करी और जालसाजी के खतरे से निपटना” (प्रोटेक्टिंग कंज्यूमर्स: एड्रेसिंग द थ्रेट ऑफ स्मगलिंग एंड काउंटरफिटिंग) विषय पर आयोजित सेमिनार में अपने एक विशेष वीडियो संबोधन में मंत्री ने कहा, “तस्करी और जालसाजी ऐसे अपराध नहीं हैं, जिनसे किसी को खतरा नहीं है। ये गतिविधियां उपभोक्ताओं को असुरक्षित, घटिया और कई मामलों में जहरीले उत्पादों के संपर्क में लाती हैं। इनसे ईमानदारी से व्यवसाय करने वालों को नुकसान होता है और सरकारी राजस्व भी कम होता है, जिसका इस्तेमाल जन कल्याण और बुनियादी ढांचे में निवेश के लिए किया जा सकता था।”

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस दिशा में प्रयासों का उद्देश्य सिर्फ उपभोक्ता संरक्षण नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं की समृद्धि है। उन्होंने नागरिकों को सशक्त बनाने के मुख्य स्तंभों के तौर पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण, राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन और ‘जागो ग्राहक जागो’ अभियान जैसी पहलों का जिक्र किया। इस दिशा में व्यापक गठबंधन का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, “नकली उत्पादों से सिर्फ कारोबार का नुकसान नहीं होता है, बल्कि यह उपभोक्ता के साथ विश्वासघात होता है। इससे निपटने के लिए सरकार, उद्योग और समाज सभी को साझा जिम्मेदारी निभानी होगी।”

अपने उद्घाटन भाषण में भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की सचिव सुश्री निधि खरे ने कहा, “हम ऐसे समय में हैं, जब भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है।”

उन्होंने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण केवल जागरूकता फैलाने तक सीमित न होकर एक टेक्नोलॉजी आधारित सिस्टम में बदल गया है। उन्होंने कहा, “हम ‘जागो ग्राहक जागो’ से लेकर एआई-आधारित शिकायत निवारण तक एक ऐसी प्रणाली तैयार कर रहे हैं जो अधिक तेज, अधिक कुशल और पारदर्शी है।” शिकायत निवारण की दिशा में आए सुधारों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने आगे कहा, “शिकायतों के समाधान की समय-सीमा 63 दिनों से घटकर लगभग 21 दिन रह गई है। कुछ ऑनलाइन मामलों में तो 72 घंटों के भीतर ही शिकायतों का समाधान हो जाता है।”

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की भूमिका पर उन्होंने कहा, “ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म बहुत बड़े पैमाने पर काम करते हैं और उनके लिए लगातार रेगुलेटरी एंगेजमेंट की जरूरत होती है। इस व्यापकता के बाद भी ये प्लेटफॉर्म जाली उत्पादों से निपटने के लिए उन्हें लिस्टिंग से हटाने और कड़ी निगरानी जैसे कदमों के माध्यम से अपनी भूमिका मजबूत कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि “यह चुनौती सिर्फ डिजिटल मार्केटप्लेस तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह फिजिकल सप्लाई चेन तक फैली हुई है।”

इस समस्या से निपटने के लिए उन्होंने एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसा दृष्टिकोण अपनाना होगा, जिसमें गुणवत्ता के कड़े मानक हों, एमएसएमई को समर्थन मिले, प्लेटफॉर्म की जवाबदेही बढ़े और डिजिटल व फिजिकल, दोनों तरह के बाजारों में बेहतर एन्फोर्समेंट की व्यवस्था बने।

अपने स्वागत संबोधन में फिक्की कास्केड के चेयरमैन श्री अनिल राजपूत ने कहा, “आज के दौर में उपभोक्ता संरक्षण की दिशा में बढ़ने के लिए सिर्फ प्रतिक्रिया देने से काम नहीं चलेगा। हमें इससे आगे रोकथाम पर केंद्रित, व्यवस्थित और भविष्य को ध्यान में रखने वाली प्रणाली तैयार करने की दिशा में निर्णायक तरीके से बढ़ना होगा। भारत सरकार ने ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019’ के माध्यम से ‘केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण’ की स्थापना करके और ‘जागो ग्राहक जागो’ जैसी पहलों के माध्यम से महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। अब अवैध व्यापार के बदलते स्वरूप को देखते हुए इस दिशा में और भी मजबूत कार्यान्वयन एवं विभिन्न संस्थाओं के बीच गहरे समन्वय की आवश्यकता है। हमें विभिन्न एजेंसियों के बीच खुफिया जानकारियों को बेहतर तरीके से साझा करने, कानून क्रियान्वित करने के लिए मजबूत तंत्र बनाने और नियमों के उल्लंघन का पता लगाने व उन्हें रोकने के लिए टेक्नोलॉजी के अधिक से अधिक प्रयोग की जरूरत है। इसके साथ-साथ, तस्करी और जालसाजी से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए ‘संपूर्ण समाज को साथ लेकर चलने का दृष्टिकोण अपनाना भी अनिवार्य है। इसके तहत सरकार, उद्योग एवं उपभोक्ता, सभी को मिलकर काम करना होगा।

स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक डॉ. अश्विनी महाजन ने कहा, “अवैध व्यापार से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए मजबूत और लगातार राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है। नोटबंदी जैसे निर्णायक नीतिगत कदमों ने पहले भी यह दिखाया है कि कैसे दृढ़ता से की गई कार्रवाई नकली और अवैध तंत्र को प्रभावित कर सकती है। एन्फोर्समेंट मैकेनिज्म को मजबूत करने की जरूरत है, खासकर सीमाओं पर। सीमा शुल्क के मोर्चे पर निगरानी में कमी के कारण अवैध उत्पाद घरेलू बाजार में पहुंचता है।”

फिक्की कास्केड के सलाहकार और सीबीआईसी के पूर्व चेयरमैन श्री पी.सी. झा ने प्रवर्तन और प्रशासन (एन्फोर्समेंट एंड गवर्नेंस) के संबंध में एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि उपभोक्ता संरक्षण को आर्थिक नीति का एक अभिन्न स्तंभ माना जाना चाहिए।

निष्कर्ष के तौर पर उन्होंने कहा, “तस्करी और जालसाजी मुख्यत: मुनाफे से जुड़े अपराध हैं। इनका नेटवर्क खत्म करने के लिए सिर्फ ऐसे उत्पादों की खेप पकड़ने के बजाय उनके फाइनेंशियल फ्लो (वित्तीय प्रवाह) को बाधित करना जरूरी है।”

सेमिनार में वरिष्ठ नीति-निर्माता, न्यायिक क्षेत्र से जुड़े अग्रणी लोग, प्रवर्तन अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि और उपभोक्ता संगठन एक साथ आए। इसका उद्देश्य अवैध व्यापार के बढ़ते खतरे और उपभोक्ताओं को केंद्र में रखने वाले मजबूत ढांचे की जरूरत को लेकर विमर्श करना था।

विभिन्न सत्रों के दौरान हुई चर्चाओं में उपभोक्ता जागरूकता, न्यायिक तत्परता, नियामकीय समन्वय और टेक्नोलॉजी-आधारित प्रवर्तन के महत्व पर जोर दिया गया। इस दौरान यह बात कई बार उभरकर सामने आई कि हमें टुकड़ों में उपाय करने के बजाय एक सुसंगत और पूरे तंत्र को साथ लेकर चलने वाली व्यवस्था की ओर बढ़ना होगा।