जब दो संतों का हुआ मिलन: जाते-जाते सबका दिल चुराकर साथ ले गए बिहार के पूर्व महामहिम आरिफ मोहम्मद खान

पटना। बिहार के पूर्व महाहिम राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान अपनी विद्वता, बेबाक-बेलाग अभिव्यक्ति, मिलनसार स्वभाव और खरी-खरी बोलकर भी आलोचकों को भी अपना मुरीद बनाने के लिए जाने जाते हैं। पारिवारिक समारोह में अभिभावक, शैक्षिक समारोह मेंं शिक्षक और धार्मिक समारोह में संत की भूमिका में खुद को सर्वस्वीकार्य बना लेना उनकी खूबियो में शुमार है।

एक ऐसे है मौके पर सोमवार को आरिफ मोहम्मद खान पटना स्थित रामकृष्ण मिशन के आश्रम पहुंचे। वहां उन्होंने रामकृष्ण मिशन के पटना क्षेत्र के सचिव स्वामी शुखेन महाराज से बहुप्रतीक्षित मुलाकात की। इस मौके पर वित्त विशेषज्ञ और समाजसेवी देवेश कुमार भी मौजद रहे। यह मुलाकात बहुप्रतीक्षित इसलिए कि इसके लिए काफी समय से कोशिश हो रही थी लेकिन किसी न किसी वजह से मुलाकात संभव नहीं हो पा रही थी।

दो संतों की मुलाकात कैसे

पटना में सोमवार को रामकृष्ण मिशन के आश्रम में मिशन के सचिव शुखेन महाराज से मुलाकात करते बिहार के पूर्व राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान। साथ में पूर्व महामहिम से बात करते समाजसेवी देवेश कुमार एवं अन्य।

स्वामी शुखेन महाराज से यह मुलाकात एक पूर्व राज्यपाल की नहीं बल्कि एक संत की दूसरे संत से मुलाकात जैसी है। आरिफ मोहम्मद खान की पहचान देश मेंं राजनेता से कहीं ज्यादा एक ऐसे विद्वान के रूप में है जिन्हें करीब-करीब सभी संप्रदायों के मुख्य ग्रंथों पर बराबर की पकड़ है। यही वजह है कि वह जहां भी जाते हैं उस संप्रदाय के लोग उन्हें अपने धर्म का विद्वान समझते हैं और और अवाक होकर सुनते हैं।

सबके चेहरे पर मुस्कान लाने की कला

आरिफ मोहम्मद खान गंभीर माहौल मेंं भी अपनी बातों से सबके चेहरे पर मुस्कान बिखेरने की कला के लिए जाने जाते हैं। बातों-बातों में रामायण और गीता के श्लोक सुनाकर आसान शब्दों मेंं गंभीर तथ्यों को समझा देने की कला वह बखूबी जानते हैं। कुछ इसी तरह की कला में शुखेन महाराज भी महारत रखते हैं। यही वजह है कि जब बहुप्रतीक्षित मुलाकात इन दो विद्वानों-संतों के बीच हुई तो माहौल गंभीर नहीं बल्कि बेहद खुशनुमा रहा। जबकि सूत्रों का कहना है कि इस दौरान कई समसामयिक मुद्दों पर चर्चा हुई।

एक-दूसरे को बढ़कर सम्मान देना

आरिफ मोहम्मद खान अलग-अलग संप्रदाय के विद्वानों से मिलकर उनसे चर्चा करने के लिए जाने जाते हैं। इसी कड़ी में शुखेन महाराज से मिलना चाहते थे। जबकि शुखेन महाराज भी इसके लिए उत्सुक थे। बिहार के महामहिम रहते आरिफ मोहम्मद खान अपनी व्यस्तता के बीच कुछ समय निकालकर राजभवन मेंं भी मिल सकते थे। लेकिन आरिफ मोहम्मद खान इससे परे हटकर सोंचने के लिए जाने जाते हैं। वह जानते हैं कि एक संत का सम्मान सबसे अधिक कैसे किया जा सकता है। जब एक संत आपसे मिलने आए वह संत का सही सम्मान नहीं बल्कि शीर्ष पद पर रहकर आप संत से मिलने उसके द्वार तक जाएं वह उस संत का सम्मान है। यही वजह है कि बिहार के पूर्व महामहिम संतों के बीच संत, छात्रों के बीच शिक्षक और पारिवारिक समारोह मेंं अभिभावक के रूप मेंं जाने जाते हैं। बिहार मेंं करीब सवा साल के कार्यकाल मेंं आरिफ मोहम्मद खान हर वर्ग के बीच मुस्कान बिखेरकर उनका दिल चुराकर विदा हुए हैं।