पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरदर्शी सोच, सक्रिय नेतृत्व और निरंतर मॉनिटरिंग का ही परिणाम है कि आज बिहार औद्योगिक निवेश के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। जिस बिहार को वर्षों तक अवसरविहीन बताकर बदनाम किया गया, वही बिहार अब उद्योगों के जाल से आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव तैयार कर रहा है। यह बातें प्रदेश भाजपा प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने कही।
मुख्यमंत्री स्वयं औद्योगिक परियोजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा कर रहे हैं, निवेशकों से सीधा संवाद स्थापित कर रहे हैं और प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दे रहे हैं कि फाइल नहीं, फैसले चलें। यही कारण है कि औद्योगिक पार्क, फूड प्रोसेसिंग यूनिट, टेक्सटाइल हब, स्टार्ट-अप इकोसिस्टम और MSME सेक्टर में तेज़ी से काम आगे बढ़ रहा है।
इस सक्रिय शासन मॉडल का सबसे बड़ा लाभ बिहार के युवाओं को मिलने वाला रोजगार है। फैक्ट्री, यूनिट और उद्योग स्थानीय स्तर पर स्थापित होने से पलायन की मजबूरी खत्म होगी और युवा अपने ही जिले में सम्मानजनक रोजगार पाएँगे। यह केवल उद्योग विस्तार नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की ठोस शुरुआत है।
पटेल ने आगे कहा कि आज बिहार की पहचान बदल रही है— जहाँ कभी निवेश से लोग डरते थे, आज वही निवेशक भरोसे के साथ बिहार की ओर देख रहे हैं। कानून-व्यवस्था, आधारभूत संरचना, बिजली, सड़क और डिजिटल कनेक्टिविटी में हुए सुधारों ने बिहार को उद्योग-अनुकूल राज्य बना दिया है।
विपक्ष जो केवल बयानबाज़ी और नकारात्मक राजनीति में उलझा है, उसे ज़मीनी हकीकत देखने की ज़रूरत है। जनता सब देख रही है— कौन विकास की बात करता है और कौन विकास को रोकने की साज़िश।
मुख्यमंत्री की सक्रियता, प्रशासन की गति और सरकार की नीयत स्पष्ट जो, बिहार अब पिछड़ेपन की पहचान नहीं, संभावनाओं की प्रयोगशाला बनेगा। आने वाले वर्षों में उद्योगों का यह जाल बिहार को आर्थिक रूप से सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित राज्यों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा करेगा।






